गुरुवार, 7 दिसंबर 2023

संविधान का प्रस्तावना: भारतीय संविधान का मौलिक स्वरूप संविधान का धर्मनिरपेक्षता का मूल्य

संविधान का प्रस्तावना पंजीकृत: एक समृद्ध और समृद्धिकरण युक्त यात्रा

जय भीम दोस्तों संविधान दिवस के अवसर पर हम सबसे पहले बात करेंगे संविधान की उद्देशिका पर, दोस्तों किसी भी देश का संविधान उस देश का सर्वोच्च कानूनी दस्तावेज होता है। मतलब यह है की एक कानूनी किताब होती है। 

हर एक किताब में एक प्रस्तावना होती है जो किताब लिखने के उद्देश्य को समझाती है। ऐसे ही हमारे संविधान का एक उद्देश्य उस की उद्देशिका में बताया गया है। इसमें बताया गया है कि हम आने वाले समय में अपने देश और देशवासियों को कैसा देखना चाहते हैं।

 अब आइये सबसे पहले हम देखते हैं कि हमारे संविधान की उद्देशिका में क्या है? इसे हम पढ़ते हैं।और आप भी ध्यान से सुनियेगा हम भारत के लोग भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी पंथ निरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उनके समस्त नागरिकको को सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की क्षमता प्राप्त करने के लिए 

तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा, राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करनेवाली बंधुता को बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर 1949 को एतत्द्वार इस संविधान को अंगीकार अधिनियमित  और आत्म समर्पित करते है दोस्तों, ये है हमारे संविधान की उद्देशिका दोस्तों अगर इस उद्देश्य को हम ध्यान से पढ़ें तो हमे ये उद्देशिका चार बातें बताती हैं।

 पहली की इसमें संकल्प किया जा रहा है और ये संकल्प कौन कर रहा है? दूसरी इस देश को कैसा बनाया जाएगा? तीसरी इस देश के नागरिको को क्या दिया जायेगा? चौथी संविधान स्वीकृत करने की तारीख बताई गई है दोस्तों आगे के वीडियो में हम उद्देशिका के हर एक शब्द को समझने की कोशिश करेंगे।

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