संविधान का प्रस्तावना भारतीय संविधान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हमारे देश के मौलिक सिद्धांतों और मूल धारों का संक्षेप में प्रस्तुत करता है। 'संविधान का प्रस्तावना' शब्द से ही स्पष्ट होता है कि यह एक ऐसा भाग है जो संविधान की प्राथमिकताओं और सिद्धांतों को सार्थकता से सारगर्भित करता है।
तो उस दौरान हमारे संविधान की जो उद्देशिका है, उस उद्देशिका की शुरुआत किन शब्दों से करनी चाहिए। इस बात को लेकर बहुत मतभेद हुए। बहुत से डिबेट हुए और बहुत से जब डिबेट हुए तो निष्कर्ष यह निकला की कोई भी धार्मिक वाक्य ना जोड़ते हुए उसमें हम भारत के लोग इन वाक्यों को वहाँ पर जोड़ा जाना चाहिए। दोस्तों अब हम भारत के लोग इस वाक्य में छिपा गहरा अर्थ क्या है? तो हम भारत के लोग मिलकर उस संकल्प कर रहे हैं। हमारे संविधान के पीछे जो प्रेरक शक्तियां हैं वो जनता है।
इस संविधान में जो संकल्प है वो हम भारतीयों द्वारा किया गया है जो इस देश की एकता और अखंडता की भावना को मजबूत करता है। हम भारत के लोग इन तीन शब्दों में यह भावना प्रबल होती है की हम सब भारतीय हैं।और भारतीय होकर या संकल्प ले रहे हैं। यहाँ ना कोई किसी धर्म का है और ना कोई किसी जाति का।
यहाँ सिर्फ और सिर्फ हम भारतीय हैं और हम सब मिलकर कल के भारत का निर्माण करने का संकल्प ले रहे हैं और एक बार दोस्तों, भारतीय नागरिको को जो संविधान ने हक और अधिकार दिए हैं ना वो किसी राजा महाराजा या बादशाह ने उदार होकर नहीं दिए हैं बल्कि हम भारतीयों ने एक दूसरे की मानवता को दी हुई ये मान्यता हैं और ये ये क्रांतिकारी विचार है। दोस्तों जब देश आजाद हुआ तब हम एक नहीं थे,
अलग अलग बिखरे हुए थे। भारत के संविधान ने हम सबको हम भारत के लोग भारती यानी।भारत का नागरिक बना दिया। संविधान ने हम सबको मैं से हम बना दिया। हम दोस्तों अब ये देश की एकता और अखंडता को प्रबल कैसे करती है? यहाँ ना कोई मुस्लिम है, ना कोई हिंदू है, ना कोई सिख है, ना कोई ईसाई है यहाँ
पर सभी एक हैं हम भारत के लोग मतलब भारतीय मैं हिंदू हूँ, मैं मुस्लिम हूँ, मैं सिख हूँ मैं ऐसा ही हूँ मैं मैं मैं ये नहीं हम बनाया हम क्योंकि इस शब्द ने इतने सारे विविधता के लोगों को हम बना दिया। मतलब भारती बना दिया। ये हमारे संविधान की खूबसूरती है। हमारे उद्देश्य का की खूबसूरती है दोस्तों हम सभी को एक ही धागे में पिरो दिया।
पूरी दुनिया में हमारे संविधान की बातें ऐसे ही नहीं होती है। एक एक शब्द का बहुत गहरा मतलब है इसलिए पूरी दुनिया में हमारे संविधान की बातें होती है। इसीलिए उसे बनाने वाले का पूरे दुनिया में नाम है। इस शब्द में ही बाबा साहब का देशप्रेम है।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें