शनिवार, 14 जून 2025

🚁 केदारनाथ में दर्दनाक हेलीकॉप्टर हादसा! मासूम बच्चे समेत 5 की मौत, श्रद्धालुओं में मातम

 केदारनाथ (उत्तराखंड):


चारधाम यात्रा के पवित्र स्थल केदारनाथ से दुखद खबर सामने आई है। आज सुबह गौरीकुंड से केदारनाथ जा रहा एक हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया। हादसे में पायलट समेत कुल 5 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जिनमें एक मासूम बच्चा भी शामिल है।


हादसे का कारण खराब मौसम बताया जा रहा है। घटना के समय आसमान में धुंध और तेज़ हवाएं थीं। हेलीकॉप्टर आर्यन एविएशन कंपनी का था, जो नियमित रूप से श्रद्धालुओं को ले जाता है।


मौके पर तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया गया है। रेस्क्यू टीम, SDRF और स्थानीय प्रशासन ने मोर्चा संभाल लिया है। हादसे की सूचना मिलते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है।


श्रद्धालुओं की भीड़ में अफरा-तफरी मच गई, लोग डरे हुए हैं और यातायात को फिलहाल रोक दिया गया है। हादसे की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं।

"आसमान से गिरी उम्मीदें: अहमदाबाद प्लेन क्रैश की एक अनसुनी कहानी"

 अहमदाबाद | 14 जून 2025 —

हर विमान उड़ान से पहले न सिर्फ आसमान छूने की तैयारी करता है, बल्कि उसमें बैठे हर यात्री की उम्मीदें, सपने और किसी का इंतज़ार भी उड़ान भरता है। लेकिन जब वही विमान ज़मीन से टकरा जाए, तो सिर्फ एक हादसा नहीं होता — वो कई कहानियों का अधूरा पड़ जाना होता है।


अहमदाबाद में हुए इस ताज़ा प्लेन क्रैश की खबर ने देश को झकझोर कर रख दिया। अधिकतर मीडिया चैनल हेडलाइन चला रहे हैं – “तकनीकी खराबी?”, “पायलट की गलती?”, “डीजीसीए की जांच शुरू”। लेकिन इस खबर की तह में जो इंसानी पहलू है, वो कहीं खो गया है।


एक अधूरी विदाई


इस विमान में बैठी 68 वर्षीय उषा देवी, अपने बेटे से आखिरी बार मिलने मुंबई जा रही थीं। बेटे ने टिकट भेजते हुए कहा था — “माँ, इस बार तुम्हें खुद खाना बनाकर खिलाऊंगा।” लेकिन वो खाना अब सिर्फ उषा देवी की अधूरी स्मृतियों में रहेगा।


पायलट नहीं, पिता था वो


कैप्टन राकेश मेहता, जो विमान उड़ा रहे थे — उनके दो छोटे बच्चे रोज़ रात को वीडियो कॉल पर पूछते थे, “पापा कब आएंगे?” इस बार जवाब देने वाला कोई नहीं बचा। मीडिया उन्हें सिर्फ "पायलट" कह रही है, लेकिन उनके लिए वो एक पिता, पति और दोस्त भी थे — जिसकी कमी कोई तकनीकी रिपोर्ट पूरी नहीं कर सकती।


मलबे में बिखरे सपने


हादसे के बाद घटनास्थल पर एक डायरी मिली। उसमें एक युवती ने लिखा था —

“ये मेरी पहली फ्लाइट है, बहुत डर लग रहा है लेकिन पापा ने कहा था, 'बेटी उड़ो, अब तुझे कोई रोक नहीं सकता'।”


वो बेटी उड़ तो गई, लेकिन ज़िंदगी से नहीं, इस दुनिया से।


वो सवाल जो अब भी अनुत्तरित हैं


क्या हमारी विमानन सुरक्षा प्रणाली वाकई उतनी मजबूत है, जितना दावा किया जाता है?


क्या प्लेन में तकनीकी खराबी की शिकायतें पहले से मौजूद थीं?


क्या इस हादसे को टाला जा सकता था?


इन सवालों का जवाब शायद रिपोर्टें दे दें, लेकिन जिन परिवारों ने अपने अपने लोगों को खोया, उनके लिए अब कोई उत्तर मायने नहीं रखता।


आख़िरी बात


ये कोई आम हादसा नहीं था। ये उस देश में हुआ जहाँ उड़ान को आज़ादी का प्रतीक माना जाता है। और जब उड़ान ही छिन जाए, तो सिर्फ मलबा नहीं गिरता — एक देश की आत्मा पर खरोंच पड़ती है।

शुक्रवार, 30 मई 2025

डॉ बाबा साहब भीम राव आंबेडकर संविधान के निर्माता नहीं है

 नमस्कार, जय भीम दोस्तों! आज बात करेंगे ग्वालियर हाई कोर्ट में हाल ही में हुए विवाद के बारे में।







ग्वालियर हाई कोर्ट के कुछ मनुवादी वकीलों ने डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा लगाने का विरोध किया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि "हम यहाँ बाबासाहेब की मूर्ति नहीं लगने देंगे।"


यह वही देश है जहाँ सर्वोच्च न्यायालय के Chief Justice of India बनने पर सबसे पहले न्याय के प्रतीक डॉ. अंबेडकर को नमन किया जाता है।


विरोध इतना बढ़ा कि अब कुछ लोग बाबासाहेब को संविधान निर्माता मानने से भी इनकार कर रहे हैं। वे अब अंबेडकर जी के ऐतिहासिक योगदान को नकारने की कोशिश कर रहे हैं।


कथन यह सामने आया है कि

"अंबेडकर कभी संविधान निर्माता नहीं थे। कृपया उन्हें ऐसा न कहें। मैं वचन देता हूँ कि भविष्य में उन्हें संविधान निर्माता नहीं कहेंगे।"


यह बात तब कही जा रही है जब हमें मालूम है कि डॉक्टर अंबेडकर के पास 32 डिग्रियाँ थीं और वे 9 भाषाओं के ज्ञाता थे। फिर भी, आज कुछ लोग उनके संविधान निर्माता होने पर सवाल उठा रहे हैं।


अब सवाल यह उठा रहा है कि 

डॉक्टर अंबेडकर को संविधान निर्माता क्यों माना जाता है?"


जब संविधान सभा बनी, तो सभी सदस्यों के मन में एक ही प्रश्न था—"ऐसा कौन है जो पूरे देश के लिए संविधान का मसौदा बना सकता है?"


सबकी नज़र एक ही नाम पर गई— डॉक्टर भीमराव अंबेडकर। क्योंकि भारत जैसे विविध धर्म, भाषाएँ और जातियों वाले देश में ऐसा कोई और नहीं था जो संविधान को समेट सके।


विरोध करने वालों को अंबेडकर के संविधान लिखने से समस्या नहीं है, बल्कि इस बात से है कि एक दलित व्यक्ति इस ऐतिहासिक भूमिका में था।


कुछ लोग कहते हैं कि बाबासाहेब को सिर्फ आरक्षण की व्यवस्था का श्रेय जाता है और उनका योगदान केवल एससी/एसटी के लिए था।


वे कहते हैं कि संविधान के निर्माता बी. एन. राव थे, और अंबेडकर केवल कानूनी सलाहकार थे।


लेकिन इतिहास गवाह है—संविधान सभा की ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष     

  डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ही थे। प्रारूप समिति में सात सदस्य थे, पर अधिकांश सदस्य व्यस्त थे या अनुपस्थित। परिणामस्वरूप, मसौदा तैयार करने की पूरी जिम्मेदारी अंबेडकर जी पर आ गई।


टी. टी. कृष्णमाचारी ने भी संसद में कहा था:

"वैसे तो प्रारूप समिति में सात सदस्य थे, पर काम सिर्फ एक आदमी ने किया— डॉक्टर अंबेडकर ने।"


विदेशों में बाबासाहेब की मूर्तियाँ लगाई जाती हैं, उनका सम्मान किया जाता है। लेकिन भारत में, जहाँ उन्होंने जन्म लिया, वहाँ उनका अपमान किया जाता है—यह दुर्भाग्यपूर्ण है।


क्या यह जातिवाद नहीं है?

मनुवादी सोच वाले लोग इस देश के लिए खतरनाक हैं।


मेरा आग्रह है कि ऐसे लोगों का विरोध होना चाहिए। अगर ये लोग वकील के पद पर बने रहे, तो न्याय एकतरफा होगा।


मैं आप सबसे निवेदन करता हूँ कि इस सोच के खिलाफ आवाज़ उठाएं और कमेंट क

रके अपनी राय दें।


धन्यवाद। जय भीम!


🚁 केदारनाथ में दर्दनाक हेलीकॉप्टर हादसा! मासूम बच्चे समेत 5 की मौत, श्रद्धालुओं में मातम

 केदारनाथ (उत्तराखंड): चारधाम यात्रा के पवित्र स्थल केदारनाथ से दुखद खबर सामने आई है। आज सुबह गौरीकुंड से केदारनाथ जा रहा एक हेलीकॉप्टर क्रै...