बुधवार, 22 नवंबर 2023

तुलसी विवाह 2023: पारंपरिक साक्षरता का आदर्श उत्सव



परिचय

तुलसी विवाह, जो हिंदू धर्म की गहरी धारा का हिस्सा है, एक ऐसा उत्सव है जो पीढ़ियों से सजीव रूप से चला आ रहा है। यह पवित्र तुलसी पौध की शादी, भगवान विष्णु से की जाती है और सिर्फ एक धार्मिक घटना ही नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक दृश्य है जो समुदायों को एक साथ लाता है। हम जो 2023 में तुलसी विवाह के महत्व और इसके प्रचलित परंपराओं को जानते हैं, वह यह साबित करता है कि यह पुरानी परंपरा आज भी जीवंत है और लोगों को उनकी आध्यात्मिक जड़ों से जोड़ता है।



तुलसी विवाह: एक पवित्र संबंध


तुलसी विवाह, तुलसी (होली बेसिल) और भगवान विष्णु के बीच का पवित्र विवाह, हिंदू धर्म में गहरा आध्यात्मिक महत्व रखता है। इस पवित्र विवाह को एकादशी के शुभ दिन मनाया जाता है, जिससे भारत में विवाह का सीजन आरंभ होता है। "तुलसी विवाह" नाम स्वयं में पवित्रता की अंशता है, जिसमें "तुलसी" शुद्धता की प्रतीक है और "विवाह" विवाह की संकेत है। हर हिंदू परिवार में, इस पवित्र विवाह के लिए तैयारी हफ्तों पहले ही शुरू होती है, जो एक आगर्भिक और भक्तिपूर्ण वातावरण का माहौल बनाती है।

रीति-रिवाज़ का पर्दाफाश

तुलसी विवाह के साथ जुड़े हुए सविस्तृत रीति-रिवाज़ बड़े समर्पण और सजगता से किए जाते हैं। परिवारें अपने घरों को बड़ी सावधानी से साफ-सफाई करते हैं, पवित्र तुलसी पौध को इंतजार के सापेक्ष में सजाते हैं और इसे जटिल रंगोली कला से सजाते हैं। तुलसी विवाह का त्योहार सामान्यत: एक विवाह समीपण स्थापित करने का रूप लेता है, जहां तुलसी को प्रतिष्ठान विष्णु के प्रतिरूप या प्रतिमा के साथ प्रतिष्ठित किया जाता है। रीतिरिवाज़ बड़ी श्रद्धा भाव से आयोजित होते हैं, जिनमें भजन और प्रार्थनाओं के साथ यज्ञ की जाती है जो आसमान में गूंथी गई हैं।

हाल ही में, तुलसी विवाह का पालन होने लग

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